कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
मित्रों आप सभी जानते हैं
एवं हमने पढ़ा भी है कि एक समय था जब भारत को विश्वगुरु कहा व माना जाता था . फिर
धीरे धीरे समय बदलता गया या फिर हम यूँ कहें की भारत माता की वीर संताने अपनी
मातृभूमि के प्रति उदासीन होती चली गयी और परिणामस्वरूप भारत पर पहले मुगलों ने और
फिर बाद में अंग्रेजों ने जी भरकर जुल्म ढहाया और खूब लूटा और यंहा तक लूटा की
भारत का पीतल निकाल दिया मतलब भारत की समृधि समाप्त होने के कगार पर है. मैंने
बचपन से एक कहावत सुनी है कि जिसका भी दिवाला निकला हो उसके लिए “ पीतल निकल गया ”
जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता रहा है.
मुगलों ने भारतीय संस्कृति
को मिटाने के लिए हिन्दुओ पर खूब करुरता की एवं खूब जुल्म भी ढहाए. कई मुग़ल शाशकों
ने तो हिन्दुओ को जबरदस्ती मुसलमान भी बनाया और जिन हिन्दुओं ने मुस्लिम धर्मं
स्वीकार नहीं किया उन्हें अपनी जान देनी पड़ी. सिख धर्मं के गुरुओं की गौरवमय शहादत
को याद रखना ही पड़ेगा जिनकी संतान तक को दीवारों में जिन्दा चिनवा दिया गया था.
मुगलों के बाद अंग्रेज आये और अंग्रेजों ने भी उसी लूट को चालू रखा और शोषण यंहा
तक बढ़ गया कि हम अपना नाम व पहचान तक खो बैठे, आज आप इंडिया में रहते हैं शायद
आपको याद होगा कि अंग्रेजो ने भारत का नाम बदल कर इंडिया रखा था, इंडिया का मतलब
गुलाम भारत और इंडियन का अर्थ गुलाम भारत के नागरिक. आज अंग्रेजों को भारत से गए
हुए लगभग 68 वर्ष हो गए लेकिन आज तक हम आज तक अपनी मात्रभूमि को उसका असली नाम व असली
पहचान तक नहीं दे पाए. हम आज भी गुलामी वाली पहचान में जी रहे हैं और हम भारत को
विश्वगुरु बनाने का दावा करते हैं. मै यंहा पर नम्र निवेदन करना चाहता हूँ कि सबसे
पहले इंडिया को भारत तो बनाओ तभी तो भारत विश्वगुरु बनेगा. निसंदेह भारत विश्वगुरु
बन सकता है पर पहले इसे भारत तो बनाओ, आप शब्दों का उच्चारण करके देखें इंडिया
विश्वगुरु या भारत विश्वगुरु, यंहा पर आपको भारत विश्वगुरु बोलने पर जो शांति एवं
गर्व महसूस होगा वो इंडिया विश्वगुरु बोलने पर नहीं होगा. तो बताईये जब तक हम अपनी
मात्रभूमि को इसका असली नाम व असली पहचान नहीं दिला देते तब तक कैसे बनेगा भारत
विश्वगुरु ?
खैर जो भारत कभी विश्वगुरु
था, जो पूरी दुनियां को शिक्षा, सीख व सन्देश देता था, उसी भारतमाता की संतानें आज
शायद शिखा,सीख व सन्देश के तरस रही हैं. आप इस भारत भूमि, इस पवित्र धरा का इतिहास
यदि स्मरण है तो महान कहे जाने वाले सिकंदर को भी आचार्य चाणक्य ने अपने मुठी भर
ब्रहमचारी शिष्यों की मदद से, उस महान योधा को विदेशी आक्रान्ता व यवन योधा कहकर ,
भारत भूमि छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. बड़े बड़े राजाओं ने जिस सिकंदर के आगे शीश
झुकाया उस विश्वविजेता सिकंदर को , माँ भारती के एक आचार्य व तक्षशीला गुरुकुल के कुछ
ब्रहमचारियों ने मिलकर वापसी का रास्ता दिखाया तथा माँ भारती की गरीमाँ को बचाया .
आज के समय में भी बहुत सारे
ऐसे तथाकथित संत हैं जो भारत को विश्वगुरु बनाने की बात तो करते हैं, लेकिन आज मै
इसे माँ भारती का दुर्भाग्य मानता हूँ कि जिन संतों को इस पवन धरा पर भगवान से भी
जयादा सम्मान मिलता है उनमे से कुछ तथाकथित संत आज बलात्कार और हत्या जैसे संगीन
आरोपों में जेल में बंद हैं, इन तथाकथित संतो को यदि पाखंडी साधू, ढोंगी बाबा भी
कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. समय समय पर इन ढोंगी बाबाओं की काली करतूत
समाचार पत्रों एवं टी वी चैनलों पर देखने सुनने को मिलती है, क्या ऐसे तथाकथित संत
भारत को विश्वगुरु बनाने में सहयोग दे सकते हैं या हमारा समाज या फिर माँ भारती
इनसे किसी तरह की कोई अपेक्षा कर सकते हैं ? जो ढोंगी साधू अपने गुरु पद की
पवित्रता को नहीं संभाल सके, जो अपने चरित्र को पवित्र नहीं रख सके, जो देश व समाज
के लिए पैसे व सम्पति का मोह त्याग नहीं कर सके, क्या ऐसे लोग देश व समाज के लिए
खतरा नहीं हैं ? यदि हां तो फिर इस खतरे से निपटने के लिए आपकी क्या तयारियां हैं?
आप ही सोचिये कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
देश को आजाद हुए 68 साल हो गए लेकिन आज
भी भारत में बहुत से ऐसे गाँव हैं जंहा पर बिजली और पीने के पानी के भी समस्या है.
कुछ आदिवासी क्षेत्रों में तो आज भी लोगों को केवल एक समय का ही भोजन मिल पता है.
68 साल की आजादी और लोग अभी भी भूखे सोते हैं, पीने के लिए स्वच्छ पानी को तरसते
हैं. आज भी सरकारी स्कूलों में शोचालय नहीं हैं, बालिकाओं को इधर उधर छिपकर
लघुशंका आदि के लिए जाना पड़ता है, आज भी सरकारी स्कूलों में पीने का पानी नहीं है,
छोटे छोटे बच्चों को बाहर इधर उधर पानी के लिए जाना पड़ता है. आज भी बहुत से ऐसे
सार्वजनिक स्थान हैं जंहा पर मूत्रालय नहीं है लोग खुले में ही पेशाब करते हैं और
वंहा आस पास बदबू फैली रहती है लेकिन स्थानीय प्रशाशन, कोई समाज सेवी संस्था या
कोई NGO वंहा पर जरा सा चुना तक नहीं डलवा सकते. ऐसे बहुत सी अनकही छोटी मोटी
समस्याएं हैं तो क्या ऐसे में सरकार या फिर प्रशाशन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती
है ? यदि ऐसे ही देश चलता रहा तो कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
अभी 15 अगस्त को श्री मोदी
जी ने कहा की जब से वे भारत के प्रधानमंत्री बने हैं तो सरकारी अधिकारी समय पर
कार्यालय आने लगे हैं. मै यंहा पर निवेदन करना चाहता हूँ कि शायद आपको याद होगा की
श्रीमद भगवत गीता में आया है “स्वः धर्मः निधनं श्रेयः पर धर्मः भयावह:” यानि अपने
धर्मं में मरना श्रेष्ठ है और दुसरे का धर्म भय देने वाला है. सभी एवं अधिकारिओं
का धर्म है की वो समय पर कार्यालय आयें तथा इमानदारी से काम करें / जनता की सेवा करें.
इसी प्रकार सभी राजनेताओ का भी धर्म है कि वो जनता के बीच दिए गए समय पर पहुँच
जाएँ . लगभग सभी राजनेता व मंत्रिगन दिए गए समय से कई कई घंटे देरी से आते हैं. अब
आप ही सोचिये जिस जनता की सेवा के लिए मंत्रिओं व अधिकारिओं को जनता के पैसे से
पगार / सैलरी / तनख्वाह, सुरक्षा व सुख सुविधाएँ दी जाती हैं , वे उसी जनता के समय
की बिलकुल भी क़द्र नहीं करते और केवल सरकार पक्ष के नहीं विपक्ष के नेता भी ऐसा ही
करते हैं. अब आप सोचिये जिस देश में देश को चलाने वाले मंत्रीगण व अधिकारी अपने
धर्मं का पालन न करते हों, जिस देश में वन्देमातरम एवं तिरंगे का अपमान करने वालों
को दण्ड देने की बजाय सुरक्षा दी जाती हो, जिस देश के सरकारी अधिकारी व मंत्रीगण
सरकारी खजाने में से लाखों - करोड़ों रुपये के घोटाले करके या सरकारी खजाने से चोरी
करके, उस चोरी के काले धन को विदेशी बैंकों में रखते हों, जिस देश में कोई भी छोटे
से छोटा काम बिना रिश्वत के न होता हो, जिस देश के प्रसिद्ध राजनेता मंदिर में
जाने वालों पर खुल्लम खुल्ला आरोप लगातें हों, क्या उस देश के स्वर्णिम और गौरवमय
भविष्य की कल्पना की जा सकती है ? क्या वह देश विश्वगुरु बन सकता है ? आप ही बताईये
कि कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
आज उग्रवाद एक राष्ट्रीय
समस्या है लेकिन क्या उग्रवाद ऐसी बिमारी है जिसका कोई ईलाज नहीं, यदि ऐसा होता तो
पंजाब से आतंकवाद का खात्मा न होता. जब आतंकवाद और उग्रवाद की आग में झुलसते पंजाब
में शांति स्थापित की जा सकती है तो फिर उड़ीसा, झारखण्ड या अन्य राज्यों में क्यों
नहीं ? आतंकवाद और उग्रवाद को मिटाने के लिए जो नीति पंजाब में अपनाई गई क्या वह
दुसरे राज्यों में कारगर साबित नहीं हो सकती ? क्या ये आतंकवादी और उग्रवादी संगठन
भारतीय सेना, BSF, भारतीय पुलिस आदि भारत की रक्षा एजेंसीज से ज्यादा ताक़तवर हैं
या फिर हमारे राजनेता इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं ? हमारे ही देश के कुछ भाई
आज अपनी ही मात्रभूमि का आँचल छलनी करने को उतारू हैं, ऐसा क्यों ? वसुधैव:
कुटुम्बकम: का सन्देश देने वाला हमारा यह भारत देश आज अलगाववाद की आग में जल रहा
है , जब आचार्य चाणक्य तथा सरदार बल्लभ भाई पटेल इस देश को एक सूत्र में बाँध सकते
हैं तो क्या आज हमारे पास किसी संसाधन की कमी है, क्या हम यह काम नहीं कर सकते या
फिर हम करना चाहते ? या फिर वोट बैंक की खातिर कुछ स्वार्थी राजनेता इस अलगाववाद
को बनाये रखना चाहते हैं ? जब तक भारत माता की वीर संतानें अपने ही भाई बहनों के
खून के प्यासे रहेंगे, क्या तब तक भारत विश्वगुरु बन सकता है ? आप जरा मंथन कीजिये
कि कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
जंहा तक मुझे ज्ञात है सन
1947 में जब देश आजाद हुआ था तो एक रुपया एक डॉलर के समान था और आज आजादी के 68
साल के बाद हमारी करेंसी लगभग 60 गुना निचे चली गयी या यह भी कह सकते हैं कि डॉलर
60 गुना तरक्की कर गया और यदि मेरा अनुमान सही है तो मुगलों और अंग्रेजों के शासन
से पहले भारत में स्वर्ण मुद्रा चलती थी जो की विश्व की सबसे महँगी करेंसी थी यानि
कभी हमारा देश आर्थिक रूप से बहुत ही मजबूत था की घरों में भी सोने और चांदी के
बर्तन उपयोग होते थे. तभी तो भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था और आज हमारी
आर्थिक स्थिति इतनी डावांडोल हो गयी है कि हमारी करेंसी की कीमत डॉलर से 60 गुना
कम लगाई जाती है और घरों में भी एल्युमीनियम और प्लास्टिक के बर्तन उपयोग किये जा
रहे हैं. तो क्या देश की आर्थिक स्थिति को सुधारे बिना हम विश्वगुरु बनने का सपना
देख सकते हैं ? क्या देश की आर्थिक स्थिति को सुधारे बिना भारत विश्वगुरु बन सकता
है ? अब आप ही सोचिये , विचार कीजिये , मंथन कीजिये और कहिये कैसे बनेगा भारत
विश्वगुरु ?