Friday, 29 August 2014

प्रधानमंत्री जन धन योजना

प्रधानमंत्री जन धन योजना
आप सभी जानते हैं कि 15 अगस्त 2014 को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लाल किले से प्रधानमंत्री जन धन योजना की घोषणा की थी . इस योजना के अनुसार करोड़ों लोगों के सरकारी बैंकों में जीरो बैलेंस खाते खोले जा रहे हैं जिसमे उनको डेबिट कार्ड व एक लाख का दुर्घटना बीमा भी दिया जायेगा और 6 महीने बाद 5000 की ओवर ड्राफ्टिंग की सुविधा भी दी जायेगी. मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है कि इस योजना का लाभ भारत के करोड़ों लोगों को मिलेगा लेकिन एक सवाल बार बार मन में आता है कि अभी वर्तमान समय में सरकारी बैंकों में वर्तमान खाताधारकों के लिए तो सुविधा है नहीं और अब ये नए खाते खोल रहे हैं. जो लोग मिनिमम बैलेंस मेंटेन करते हैं उनको तो बैंक अधिकारी सही व संतुष्टिजनक सेवा दे नहीं पाते, फिर इन जीरो बैलेंस वाले लोगों को कैसे सेवा प्रदान कर सकेंगें ?
आज कई बैंकों में पैसे जमा करने की मशीन लगा दे गयी है , किसी किसी बैंक ने ग्रीन चैनल लगाये हैं ताकि लोग जल्दी अपना पैसा जमा कर सकें, लेकिन विडंबना इस बात कि है कि बहुत बार ऐसा होता है जब मशीन या ग्रीन चैनल काम नहीं करते तो बैंक से कोई भी संतुष्टिदायक जवाब नहीं मिलता, कई बार ग्रीन चैनल को देखने वाला अधिकारी उस ट्रांजिकसन को ही रिजेक्ट कर देता है. फिर आप बार बार उस मशीन में डेबिट कार्ड लगाते रहें तो भी अधिकारी के कान में जूं नहीं रेंगती है. सरकारी बैंकों की ओरसे ऐसी कई समस्याएं हैं जैसे की पासबुक में एंट्री करवानी है तो जवाब मिलता है कि स्टाफ नहीं है या प्रिंटर ख़राब है या फिर आज काम जयादा है कल आना आदि आदि अनेको कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. अभी माननीय प्रधानमंत्री जी ने जो प्रधानमंत्री जन धन योजना चलाई है क्या उन लोगो को इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा ? जो लोग बैंक को पैसे देकर अपना खाता चलाते हैं जब बैंक उनकों उचित सेवा नहीं दे पाते, उनको उचित सम्मान नहीं दे पाते, तो क्या इन जीरो बैलेंस वालों को दे पायेंगे ?
प्रधानमंत्री जी हम आपकी प्रधानमंत्री जन धन योजना का स्वागत करते हैं लेकिन क्या इस योजना से पहले बैंकों की सेवाओं को बेहतर करने की जरुरत नहीं है ? क्या बैंक अधिकारीयों को गाहकों का सम्मान करने की प्रशिक्षण देने की जरुरत नहीं है ? प्रधानमंत्री जी आपकी सोच क्या है मुझे नहीं पता लेकिन अच्छा होता कि “प्रधानमंत्री जन धन योजना” से पहले बैंकों की सुविधा को बेहतर करने एवं बैंक अधिकारिओं को ग्राहकों के साथ अच्छा व्यहार करने की कोई योजना बनाते . अच्छा होता कि बैंकों की छुट्टियाँ कम की जाती ताकि बैंक साल में ज्यादा से ज्यादा दिन खुल्ले रहें और लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा मिल सके, अच्छा होता कि बैंकों में नकदी जमा करने न नकद निकासी को आसान बनाने की कोई योजना बनाई जाती. अच्छा होता कि बैंकों में शाखा भेद दूर करने कि कोई योजना बनाई जाती.
सरकारी बैंकों के ATM मशीन ख़राब पड़ी रहती हैं, अच्छा होता कि इन मशीनों की मुरम्मत और सुरक्षा  के लिए कोई योजना बनाई जाती . अच्छा होता कि आप पहले यह जान लेते कि क्या भारतीय बैंक इन अतिरिक्त खातों के बोझ को सहन करने एवं इनको सुविधा देने में सक्षम भी हैं या नहीं ?

आदरणीय प्रधानमंत्री जी आपसे मेरा नम्र निवेदन है कि बैंक व्यस्था को सुधरने की भी कोई योजना बनायें ताकि लोग अपने आप बैंकों की तरफ आकर्षित हों. लोगों को सरकारी बैंकों की सेवा निजी बैंकों से ज्यादा अच्छी लगे और जनता स्वयं चलकर सरकारी बैंकों में आये, आपकी योजना से भी निसंदेह लोग बैंकों में तो आयेंगें लेकिन बैंकिंग सुविधा लेने नहीं बल्कि 5000 की ओवेरड्राफ्टिंग से आकर्षित होकर आयेंगे. खैर मेरी तो शुभकामना है कि आपकी – हमारी “प्रधानमंत्री जन धन योजना” खूब सफल हो. 

Wednesday, 27 August 2014

कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?

कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?

          मित्रों आप सभी जानते हैं एवं हमने पढ़ा भी है कि एक समय था जब भारत को विश्वगुरु कहा व माना जाता था . फिर धीरे धीरे समय बदलता गया या फिर हम यूँ कहें की भारत माता की वीर संताने अपनी मातृभूमि के प्रति उदासीन होती चली गयी और परिणामस्वरूप भारत पर पहले मुगलों ने और फिर बाद में अंग्रेजों ने जी भरकर जुल्म ढहाया और खूब लूटा और यंहा तक लूटा की भारत का पीतल निकाल दिया मतलब भारत की समृधि समाप्त होने के कगार पर है. मैंने बचपन से एक कहावत सुनी है कि जिसका भी दिवाला निकला हो उसके लिए “ पीतल निकल गया ” जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता रहा है.
          मुगलों ने भारतीय संस्कृति को मिटाने के लिए हिन्दुओ पर खूब करुरता की एवं खूब जुल्म भी ढहाए. कई मुग़ल शाशकों ने तो हिन्दुओ को जबरदस्ती मुसलमान भी बनाया और जिन हिन्दुओं ने मुस्लिम धर्मं स्वीकार नहीं किया उन्हें अपनी जान देनी पड़ी. सिख धर्मं के गुरुओं की गौरवमय शहादत को याद रखना ही पड़ेगा जिनकी संतान तक को दीवारों में जिन्दा चिनवा दिया गया था. मुगलों के बाद अंग्रेज आये और अंग्रेजों ने भी उसी लूट को चालू रखा और शोषण यंहा तक बढ़ गया कि हम अपना नाम व पहचान तक खो बैठे, आज आप इंडिया में रहते हैं शायद आपको याद होगा कि अंग्रेजो ने भारत का नाम बदल कर इंडिया रखा था, इंडिया का मतलब गुलाम भारत और इंडियन का अर्थ गुलाम भारत के नागरिक. आज अंग्रेजों को भारत से गए हुए लगभग 68 वर्ष हो गए लेकिन आज तक हम आज तक अपनी मात्रभूमि को उसका असली नाम व असली पहचान तक नहीं दे पाए. हम आज भी गुलामी वाली पहचान में जी रहे हैं और हम भारत को विश्वगुरु बनाने का दावा करते हैं. मै यंहा पर नम्र निवेदन करना चाहता हूँ कि सबसे पहले इंडिया को भारत तो बनाओ तभी तो भारत विश्वगुरु बनेगा. निसंदेह भारत विश्वगुरु बन सकता है पर पहले इसे भारत तो बनाओ, आप शब्दों का उच्चारण करके देखें इंडिया विश्वगुरु या भारत विश्वगुरु, यंहा पर आपको भारत विश्वगुरु बोलने पर जो शांति एवं गर्व महसूस होगा वो इंडिया विश्वगुरु बोलने पर नहीं होगा. तो बताईये जब तक हम अपनी मात्रभूमि को इसका असली नाम व असली पहचान नहीं दिला देते तब तक कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
          खैर जो भारत कभी विश्वगुरु था, जो पूरी दुनियां को शिक्षा, सीख व सन्देश देता था, उसी भारतमाता की संतानें आज शायद शिखा,सीख व सन्देश के तरस रही हैं. आप इस भारत भूमि, इस पवित्र धरा का इतिहास यदि स्मरण है तो महान कहे जाने वाले सिकंदर को भी आचार्य चाणक्य ने अपने मुठी भर ब्रहमचारी शिष्यों की मदद से, उस महान योधा को विदेशी आक्रान्ता व यवन योधा कहकर , भारत भूमि छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. बड़े बड़े राजाओं ने जिस सिकंदर के आगे शीश झुकाया उस विश्वविजेता सिकंदर को , माँ भारती के एक आचार्य व तक्षशीला गुरुकुल के कुछ ब्रहमचारियों ने मिलकर वापसी का रास्ता दिखाया तथा माँ भारती की गरीमाँ को बचाया .
          आज के समय में भी बहुत सारे ऐसे तथाकथित संत हैं जो भारत को विश्वगुरु बनाने की बात तो करते हैं, लेकिन आज मै इसे माँ भारती का दुर्भाग्य मानता हूँ कि जिन संतों को इस पवन धरा पर भगवान से भी जयादा सम्मान मिलता है उनमे से कुछ तथाकथित संत आज बलात्कार और हत्या जैसे संगीन आरोपों में जेल में बंद हैं, इन तथाकथित संतो को यदि पाखंडी साधू, ढोंगी बाबा भी कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. समय समय पर इन ढोंगी बाबाओं की काली करतूत समाचार पत्रों एवं टी वी चैनलों पर देखने सुनने को मिलती है, क्या ऐसे तथाकथित संत भारत को विश्वगुरु बनाने में सहयोग दे सकते हैं या हमारा समाज या फिर माँ भारती इनसे किसी तरह की कोई अपेक्षा कर सकते हैं ? जो ढोंगी साधू अपने गुरु पद की पवित्रता को नहीं संभाल सके, जो अपने चरित्र को पवित्र नहीं रख सके, जो देश व समाज के लिए पैसे व सम्पति का मोह त्याग नहीं कर सके, क्या ऐसे लोग देश व समाज के लिए खतरा नहीं हैं ? यदि हां तो फिर इस खतरे से निपटने के लिए आपकी क्या तयारियां हैं? आप ही सोचिये कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
                देश को आजाद हुए 68 साल हो गए लेकिन आज भी भारत में बहुत से ऐसे गाँव हैं जंहा पर बिजली और पीने के पानी के भी समस्या है. कुछ आदिवासी क्षेत्रों में तो आज भी लोगों को केवल एक समय का ही भोजन मिल पता है. 68 साल की आजादी और लोग अभी भी भूखे सोते हैं, पीने के लिए स्वच्छ पानी को तरसते हैं. आज भी सरकारी स्कूलों में शोचालय नहीं हैं, बालिकाओं को इधर उधर छिपकर लघुशंका आदि के लिए जाना पड़ता है, आज भी सरकारी स्कूलों में पीने का पानी नहीं है, छोटे छोटे बच्चों को बाहर इधर उधर पानी के लिए जाना पड़ता है. आज भी बहुत से ऐसे सार्वजनिक स्थान हैं जंहा पर मूत्रालय नहीं है लोग खुले में ही पेशाब करते हैं और वंहा आस पास बदबू फैली रहती है लेकिन स्थानीय प्रशाशन, कोई समाज सेवी संस्था या कोई NGO वंहा पर जरा सा चुना तक नहीं डलवा सकते. ऐसे बहुत सी अनकही छोटी मोटी समस्याएं हैं तो क्या ऐसे में सरकार या फिर प्रशाशन की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है ? यदि ऐसे ही देश चलता रहा तो कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
          अभी 15 अगस्त को श्री मोदी जी ने कहा की जब से वे भारत के प्रधानमंत्री बने हैं तो सरकारी अधिकारी समय पर कार्यालय आने लगे हैं. मै यंहा पर निवेदन करना चाहता हूँ कि शायद आपको याद होगा की श्रीमद भगवत गीता में आया है “स्वः धर्मः निधनं श्रेयः पर धर्मः भयावह:” यानि अपने धर्मं में मरना श्रेष्ठ है और दुसरे का धर्म भय देने वाला है. सभी एवं अधिकारिओं का धर्म है की वो समय पर कार्यालय आयें तथा इमानदारी से काम करें / जनता की सेवा करें. इसी प्रकार सभी राजनेताओ का भी धर्म है कि वो जनता के बीच दिए गए समय पर पहुँच जाएँ . लगभग सभी राजनेता व मंत्रिगन दिए गए समय से कई कई घंटे देरी से आते हैं. अब आप ही सोचिये जिस जनता की सेवा के लिए मंत्रिओं व अधिकारिओं को जनता के पैसे से पगार / सैलरी / तनख्वाह, सुरक्षा व सुख सुविधाएँ दी जाती हैं , वे उसी जनता के समय की बिलकुल भी क़द्र नहीं करते और केवल सरकार पक्ष के नहीं विपक्ष के नेता भी ऐसा ही करते हैं. अब आप सोचिये जिस देश में देश को चलाने वाले मंत्रीगण व अधिकारी अपने धर्मं का पालन न करते हों, जिस देश में वन्देमातरम एवं तिरंगे का अपमान करने वालों को दण्ड देने की बजाय सुरक्षा दी जाती हो, जिस देश के सरकारी अधिकारी व मंत्रीगण सरकारी खजाने में से लाखों - करोड़ों रुपये के घोटाले करके या सरकारी खजाने से चोरी करके, उस चोरी के काले धन को विदेशी बैंकों में रखते हों, जिस देश में कोई भी छोटे से छोटा काम बिना रिश्वत के न होता हो, जिस देश के प्रसिद्ध राजनेता मंदिर में जाने वालों पर खुल्लम खुल्ला आरोप लगातें हों, क्या उस देश के स्वर्णिम और गौरवमय भविष्य की कल्पना की जा सकती है ? क्या वह देश विश्वगुरु बन सकता है ? आप ही बताईये कि कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
          आज उग्रवाद एक राष्ट्रीय समस्या है लेकिन क्या उग्रवाद ऐसी बिमारी है जिसका कोई ईलाज नहीं, यदि ऐसा होता तो पंजाब से आतंकवाद का खात्मा न होता. जब आतंकवाद और उग्रवाद की आग में झुलसते पंजाब में शांति स्थापित की जा सकती है तो फिर उड़ीसा, झारखण्ड या अन्य राज्यों में क्यों नहीं ? आतंकवाद और उग्रवाद को मिटाने के लिए जो नीति पंजाब में अपनाई गई क्या वह दुसरे राज्यों में कारगर साबित नहीं हो सकती ? क्या ये आतंकवादी और उग्रवादी संगठन भारतीय सेना, BSF, भारतीय पुलिस आदि भारत की रक्षा एजेंसीज से ज्यादा ताक़तवर हैं या फिर हमारे राजनेता इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं ? हमारे ही देश के कुछ भाई आज अपनी ही मात्रभूमि का आँचल छलनी करने को उतारू हैं, ऐसा क्यों ? वसुधैव: कुटुम्बकम: का सन्देश देने वाला हमारा यह भारत देश आज अलगाववाद की आग में जल रहा है , जब आचार्य चाणक्य तथा सरदार बल्लभ भाई पटेल इस देश को एक सूत्र में बाँध सकते हैं तो क्या आज हमारे पास किसी संसाधन की कमी है, क्या हम यह काम नहीं कर सकते या फिर हम करना चाहते ? या फिर वोट बैंक की खातिर कुछ स्वार्थी राजनेता इस अलगाववाद को बनाये रखना चाहते हैं ? जब तक भारत माता की वीर संतानें अपने ही भाई बहनों के खून के प्यासे रहेंगे, क्या तब तक भारत विश्वगुरु बन सकता है ? आप जरा मंथन कीजिये कि कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?
          जंहा तक मुझे ज्ञात है सन 1947 में जब देश आजाद हुआ था तो एक रुपया एक डॉलर के समान था और आज आजादी के 68 साल के बाद हमारी करेंसी लगभग 60 गुना निचे चली गयी या यह भी कह सकते हैं कि डॉलर 60 गुना तरक्की कर गया और यदि मेरा अनुमान सही है तो मुगलों और अंग्रेजों के शासन से पहले भारत में स्वर्ण मुद्रा चलती थी जो की विश्व की सबसे महँगी करेंसी थी यानि कभी हमारा देश आर्थिक रूप से बहुत ही मजबूत था की घरों में भी सोने और चांदी के बर्तन उपयोग होते थे. तभी तो भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था और आज हमारी आर्थिक स्थिति इतनी डावांडोल हो गयी है कि हमारी करेंसी की कीमत डॉलर से 60 गुना कम लगाई जाती है और घरों में भी एल्युमीनियम और प्लास्टिक के बर्तन उपयोग किये जा रहे हैं. तो क्या देश की आर्थिक स्थिति को सुधारे बिना हम विश्वगुरु बनने का सपना देख सकते हैं ? क्या देश की आर्थिक स्थिति को सुधारे बिना भारत विश्वगुरु बन सकता है ? अब आप ही सोचिये , विचार कीजिये , मंथन कीजिये और कहिये कैसे बनेगा भारत विश्वगुरु ?


Thursday, 21 August 2014

सलमान खुर्शीद – आसाराम के मुरीद ?

सलमान खुर्शीद – आसाराम के मुरीद ?
मित्रो एवं सज्जनों,
शायद आपको मालूम हो कि कल यानि 19 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट में आसाराम बापू की तारीख थी , जिसमे उनकी पैरवी भारत के भूतपूर्व कानून मंत्री श्री सलमान खुर्शीद जी ने की थी.
जैसा कि आप जानते हैं की आसाराम बापू के खिलाफ एक नाबालिग लड़की से बलात्कार का मुकदमा दर्ज हुए एक साल हो गया है और लड़की भी वह, जो स्वयं तथा जिसका पूरा परिवार आसाराम का कट्टर समर्थक एवं अनुयाई था. पीड़ित लड़की आसाराम आश्रम के गुरुकुल छिंदवाडा, मध्य प्रदेश की छात्रा थी. आने वाली एक सितम्बर को आसाराम बापू को जेल में बंद हुए भी पूरा एक साल हो जाएगा .
जैसा कि आप सभी में सुना होगा कि आसाराम जी ने कई बार अपने मिडिया साक्षात्कार में कहा था कि आसाराम जी को फंसाने में कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी एवं राहुल गाँधी का हाथ है. आसाराम ने कई बार खुल्लम खुल्ला कहा था की मैडम सोनिया व उनके बेटे के इशारे पर सब काम हो रहा है. तब आसाराम ने अपने चिर परिचित अंदाज में कांग्रेस सरकार को धमकी भी दी थी. कि वे सरकार को उखाड़ कर फेंक सकते हैं. क्योंकि आसाराम बापू ने एकबार गुजरात में भी मोदी सरकार को तथा उनके खिलाफ लिखने वाले अखबार को भी धमकी दी थी , धमकी देना आसाराम बापू का पुराना स्वभाव है.
खैर हम मुद्दे पर आते हैं, यह कहना गलत नहीं होगा कि हमेशा कांग्रेस को कोसने वाले आसाराम बापू अब कांग्रेस के नेताओ की शरण में हैं ताकि उनको जमानत मिल जाए. पहले तो आसाराम जेल को वैन्कुठ धाम कहते थे , अब क्या आसाराम बापू का वैन्कुठ धाम से मन ऊब गया है या मोहभंग हो गया है जो जमानत लेने के लिए उन आदमियों के पास गए जिनकी पार्टी को कभी वे खुलकर कोसने में कोई कमी नहीं छोड़ते थे. या फिर श्रीमान खुर्शीद स्वयं आसाराम के मुरीद हो गए या फिर आसाराम को जमानत के लिए उनकी मदद की जरुरत पड़ी या फिर आसाराम जी को राम जेठमलानी साहब पर विश्वास नहीं रहा या जेठमलानी साहब ने खुद आसाराम का दामन छोड़ दिया. आसाराम बापू और कांग्रेस नेता एक साथ साथ, बात कुछ हजम नहीं हो रही.
आसाराम की वकालत करते समय खुर्शीद साहब केवल एक वकील की हसियत से शीर्षस्थ अदालत में जायेंगे या फिर भूतपूर्व कानून मंत्री के पद को भी साथ लेकर जायेंगे, जो भी हो इस काम के लिए खुर्शीद साहब को संभवतः बहुत बड़ी राशि फीस के रूप में दी गयी होगी या दी जाएगी. अब देखना ये है की सलमान खुर्शीद साहब केवल शीर्षस्थ अदालत में ही आसाराम बापू की वकालत करते है या फिर मैडम सोनिया जी के दरबार में भी आसाराम की पैरवी भी करेंगे. जंहा तक मेरी समझ है की आसाराम बापू अपने कर्मों की वजह से जेल में हैं , इसमें किसी भी राजनैतिक दल का कोई हाथ नहीं है. आसाराम बापू को फंसने में तो किसी दल या मिशनरी का कोई हाथ नहीं है , हां लेकिन उनके जमानत दिलाने में संभवतः कोई न कोई मंत्री या पूर्व मंत्री या राजनेता उनकी मदद जरुर कर सकता है.
यह बात अलग है की भारत की शीर्षस्थ अदालत निष्पक्ष न्याय करती है. इसीलिए माननीय शीर्षस्थ अदालत पर भरोसा करने के अलावा कोई विकल्प भी हमारे पास नहीं है.
मेरे लिए सबसे बड़े आश्यर्य की बात तो ये है की पहले आसाराम बापू ने जोधपुर में भाजपा के एक नेता को अपना वकील बनाया तथा दिल्ली में भाजपा के नेता को छोड़कर, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता को और वो भी जो भारत सरकार के कानून मंत्री रह चुके हैं जिनका शीर्षस्थ अदालत के न्याधिशों की नियुक्ति में शायद कंही न कंही कोई न कोई रोल प्रत्यक्स या परोक्स रूप से अवश्य रहता था , आसाराम बापू गुजरात में भाजपा व मोदी सरकार को चेतावनी देते हैं और जोधपुर में भाजपा के नेता को अपना वकील बनाते हैं तथा कांग्रेस में मैडम सोनिया व राहुल गाँधी को कोसने वाले आसाराम बापू दिल्ली में कांग्रेसी नेता श्री खुर्शीद जी को अपना वकील करते हैं, आखिर आसाराम चाहता क्या है, आखिर उसकी सोच क्या है ???
खैर आसाराम की सोच जो भी हो, लेकिन मेरी सोच ये है की आसाराम बापू तथा उस पीड़ित लड़की , दोनों का नारको टेस्ट करवाना चाहिए और जो भी दोषी हो उसको भारतीय संविधान दण्ड संहिता  के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए, ताकि दुसरे लोगो में भी इसका सकारात्मक सन्देश जाए तथा भारत में कानून व्यस्था बनी रहे एवं भारत की बहु बेटियां भी निडर होकर कंही भी आ-जा सकें, कंही भी, किसी भी हॉस्टल या गुरुकुल में शांतिपूर्वक रहकर भारत निर्माण में अपना सहयोग दे सकें. कभी निचली अदालत तो कभी शीर्ष अदालत , ऐसे में एक साल का समय बीत गया है और उस पीडिता लड़की के भविष्य एवं कैरिएर पर भी असर पड़ रहा है.

जो भी मैंने ऊपर लिखा है ये मेरा व्यक्तिगत विचार है , बाकी तो अपनी शीर्षस्थ अदालत विश्व में निष्पक्ष न्याय करने के लिए प्रसिद है ही .....