प्रधानमंत्री जन धन योजना
आप सभी जानते हैं कि 15 अगस्त 2014 को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
जी ने लाल किले से “प्रधानमंत्री जन धन योजना” की घोषणा की थी . इस योजना के अनुसार करोड़ों
लोगों के सरकारी बैंकों में जीरो बैलेंस खाते खोले जा रहे हैं जिसमे उनको डेबिट
कार्ड व एक लाख का दुर्घटना बीमा भी दिया जायेगा और 6 महीने बाद 5000 की ओवर
ड्राफ्टिंग की सुविधा भी दी जायेगी. मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है कि इस योजना का
लाभ भारत के करोड़ों लोगों को मिलेगा लेकिन एक सवाल बार बार मन में आता है कि अभी
वर्तमान समय में सरकारी बैंकों में वर्तमान खाताधारकों के लिए तो सुविधा है नहीं
और अब ये नए खाते खोल रहे हैं. जो लोग मिनिमम बैलेंस मेंटेन करते हैं उनको तो बैंक
अधिकारी सही व संतुष्टिजनक सेवा दे नहीं पाते, फिर इन जीरो बैलेंस वाले लोगों को
कैसे सेवा प्रदान कर सकेंगें ?
आज कई बैंकों में पैसे जमा करने की मशीन लगा दे गयी है , किसी किसी बैंक ने
ग्रीन चैनल लगाये हैं ताकि लोग जल्दी अपना पैसा जमा कर सकें, लेकिन विडंबना इस बात
कि है कि बहुत बार ऐसा होता है जब मशीन या ग्रीन चैनल काम नहीं करते तो बैंक से कोई
भी संतुष्टिदायक जवाब नहीं मिलता, कई बार ग्रीन चैनल को देखने वाला अधिकारी उस
ट्रांजिकसन को ही रिजेक्ट कर देता है. फिर आप बार बार उस मशीन में डेबिट कार्ड
लगाते रहें तो भी अधिकारी के कान में जूं नहीं रेंगती है. सरकारी बैंकों की ओरसे
ऐसी कई समस्याएं हैं जैसे की पासबुक में एंट्री करवानी है तो जवाब मिलता है कि
स्टाफ नहीं है या प्रिंटर ख़राब है या फिर आज काम जयादा है कल आना आदि आदि अनेको
कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. अभी माननीय प्रधानमंत्री जी ने जो “प्रधानमंत्री जन धन योजना” चलाई है क्या उन लोगो को
इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा ? जो लोग बैंक को पैसे देकर अपना खाता चलाते
हैं जब बैंक उनकों उचित सेवा नहीं दे पाते, उनको उचित सम्मान नहीं दे पाते, तो
क्या इन जीरो बैलेंस वालों को दे पायेंगे ?
प्रधानमंत्री जी हम आपकी “प्रधानमंत्री जन धन योजना” का स्वागत करते हैं लेकिन क्या इस योजना से
पहले बैंकों की सेवाओं को बेहतर करने की जरुरत नहीं है ? क्या बैंक अधिकारीयों को
गाहकों का सम्मान करने की प्रशिक्षण देने की जरुरत नहीं है ? प्रधानमंत्री जी आपकी
सोच क्या है मुझे नहीं पता लेकिन अच्छा होता कि “प्रधानमंत्री जन धन योजना” से
पहले बैंकों की सुविधा को बेहतर करने एवं बैंक अधिकारिओं को ग्राहकों के साथ अच्छा
व्यहार करने की कोई योजना बनाते . अच्छा होता कि बैंकों की छुट्टियाँ कम की जाती
ताकि बैंक साल में ज्यादा से ज्यादा दिन खुल्ले रहें और लोगों को ज्यादा से ज्यादा
सुविधा मिल सके, अच्छा होता कि बैंकों में नकदी जमा करने न नकद निकासी को आसान
बनाने की कोई योजना बनाई जाती. अच्छा होता कि बैंकों में शाखा भेद दूर करने कि कोई
योजना बनाई जाती.
सरकारी बैंकों के ATM मशीन ख़राब पड़ी रहती हैं, अच्छा होता कि इन मशीनों की
मुरम्मत और सुरक्षा के लिए कोई योजना बनाई
जाती . अच्छा होता कि आप पहले यह जान लेते कि क्या भारतीय बैंक इन अतिरिक्त खातों
के बोझ को सहन करने एवं इनको सुविधा देने में सक्षम भी हैं या नहीं ?
आदरणीय प्रधानमंत्री जी आपसे मेरा नम्र निवेदन है कि बैंक व्यस्था को सुधरने
की भी कोई योजना बनायें ताकि लोग अपने आप बैंकों की तरफ आकर्षित हों. लोगों को सरकारी
बैंकों की सेवा निजी बैंकों से ज्यादा अच्छी लगे और जनता स्वयं चलकर सरकारी बैंकों
में आये, आपकी योजना से भी निसंदेह लोग बैंकों में तो आयेंगें लेकिन बैंकिंग
सुविधा लेने नहीं बल्कि 5000 की ओवेरड्राफ्टिंग से आकर्षित होकर आयेंगे. खैर मेरी
तो शुभकामना है कि आपकी – हमारी “प्रधानमंत्री जन धन योजना” खूब सफल हो.
No comments:
Post a Comment